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Artwork for Pratidin Ek Kavita
Pratidin Ek Kavita · July 25 · 1 min

Har Baar Deewaar | Jyotsna Milan

हर बार दीवार। ज्योत्स्ना मिलन आसमान होगा की उम्मीद में बाहर देखती खिड़की से बाहर दीवार होती सामने और होती फाँक भर धूप दो दीवारों के बीच धरी-सी दीवार की जगह आसमान नहीं निकला कभी घास का मैदान भी नहीं खिड़की के बाहर हर बार एक दीवार आसमान के बदले।

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हर बार दीवार।  ज्योत्स्ना मिलन


आसमान होगा की उम्मीद में

बाहर देखती खिड़की से


बाहर

दीवार होती सामने


और होती

फाँक भर धूप


दो दीवारों के बीच धरी-सी

दीवार की जगह


आसमान नहीं निकला कभी

घास का मैदान भी नहीं


खिड़की के बाहर

हर बार


एक दीवार

आसमान के बदले।